Headline
इकॉनोमी और ईकोलॉजी में समन्वय के साथ मानव जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य- मुख्यमंत्री
इकॉनोमी और ईकोलॉजी में समन्वय के साथ मानव जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य- मुख्यमंत्री
देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली, मुख्यमंत्री धामी हुए शामिल
देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली, मुख्यमंत्री धामी हुए शामिल
प्रधानमंत्री मोदी ने टिहरी सड़क हादसे पर जताया दुःख
प्रधानमंत्री मोदी ने टिहरी सड़क हादसे पर जताया दुःख
मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से भूतपूर्व सैनिक के एक प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से भूतपूर्व सैनिक के एक प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव करता रहेगा प्रेरित- सीएम
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव करता रहेगा प्रेरित- सीएम
मुख्यमंत्री धामी ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया स्वागत
मुख्यमंत्री धामी ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया स्वागत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में चमकेगा उत्तराखंड : रेखा आर्या
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में चमकेगा उत्तराखंड : रेखा आर्या
मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं

प्रीति पाल ने पेरिस 2024 पैरालिंपिक में जीते दो कांस्य पदक

प्रीति पाल ने पेरिस 2024 पैरालिंपिक में जीते दो कांस्य पदक

नई दिल्ली – प्रीति पाल ने पेरिस 2024 पैरालिंपिक में अपने असाधारण प्रदर्शन से इतिहास रच दिया, जब उन्होंने महिलाओं की टी35 श्रेणी में 100 मीटर और 200 मीटर स्पर्धाओं में दो कांस्य पदक जीते। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई, बल्कि इसके साथ ही वह एक ही पैरालिंपिक खेल में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला ट्रैक एंड फील्ड एथलीट भी बन गई हैं।

शुरुआती जीवन: चुनौतियों से भरा बचपन – उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 22 सितंबर, 2000 को जन्मी प्रीति का बचपन कई चुनौतियों से भरा था। जन्म के छह दिन बाद ही उनके पैरों में प्लास्टर लगा दिया गया, जिससे वह विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करने लगीं। उन्होंने पारंपरिक उपचार से अपने पैरों को मजबूत बनाया और पांच साल की उम्र में कैलिपर्स का उपयोग करना शुरू किया, जो उन्होंने आठ साल तक पहने।

एक नई राह की तलाश: पैरालिंपिक से प्रेरणा – 17 साल की उम्र में सोशल मीडिया पर पैरालिंपिक खेलों के बारे में जानने के बाद प्रीति के जीवन का नजरिया बदल गया। उन्होंने एक स्थानीय स्टेडियम में अभ्यास करना शुरू किया, हालांकि वित्तीय बाधाओं ने उनके नियमित अभ्यास में रुकावट डाली। पैरालिंपिक एथलीट फातिमा खातून से मिलने के बाद उनकी किस्मत बदल गई, जिन्होंने उन्हें पैरा-एथलेटिक्स से परिचित कराया। 2018 में स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने के साथ ही प्रीति के एथलेटिक सफर की शुरुआत हुई।

सरकारी मदद: उनकी यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका – प्रीति की सफलता में सरकारी हस्तक्षेपों ने अहम भूमिका निभाई। खेलो इंडिया और टीओपीएस जैसे कार्यक्रमों से मिली सहायता, एसएआई जेएलएन स्टेडियम में कोच गजेंद्र सिंह के तहत प्रशिक्षण ने उनके प्रदर्शन को और भी निखारा।

वैश्विक मंच पर विजय – प्रीति के अथक प्रयासों का नतीजा 2024 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में दिखा, जहां उन्होंने 100 मीटर और 200 मीटर स्पर्धाओं में कांस्य पदक हासिल किए। पेरिस 2024 पैरालिंपिक में उनकी इस ऐतिहासिक सफलता ने उन्हें वैश्विक मंच पर एक दुर्जेय प्रतियोगी के रूप में स्थापित कर दिया।

23 साल की उम्र में प्रीति पाल ने न केवल अपने गांव का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे देश को गर्व से भर दिया। उनकी कहानी एक प्रेरणा है जो दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से सभी बाधाओं को पार किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top