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सत्ता के सपने देखने वालों को जनता ने दिया जवाब- एकनाथ शिंदे

सत्ता के सपने देखने वालों को जनता ने दिया जवाब- एकनाथ शिंदे

2.5 करोड़ महिलाओं के लिए बनाई गई योजनाओं को गिनाते हुए बोले उपमुख्यमंत्री, “महायुति को बहनों ने फिर से चुना”

ठाणे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर अप्रत्यक्ष हमला बोलते हुए कहा कि “जब रोम जल रहा था, नीरो बांसुरी बजा रहा था” — यानी आत्मनिरीक्षण की जगह कुछ नेता आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हुए हैं। उन्होंने यह टिप्पणी ठाणे में चिकित्सा उद्यमियों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए की।

नीरो की मिसाल देकर उद्धव पर वार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिंदे ने बिना नाम लिए उद्धव ठाकरे पर तंज कसा कि कुछ लोग अपनी ही पार्टी छोड़कर जाने वालों पर जश्न मनाते हैं, जबकि उन्हें हालात का गंभीरता से आकलन करना चाहिए। “जब रोम जल रहा था, नीरो बांसुरी बजा रहा था” कहकर उन्होंने इशारे में नेतृत्व शैली पर सवाल उठाया।

चुनाव नतीजे और चुनाव आयोग पर सवालों पर टिप्पणी
शिंदे ने विपक्षी दलों के रवैये को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हार मिलने पर वे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं, लेकिन जीतते ही उसी संस्था की प्रशंसा करने लगते हैं। उन्होंने इसे दोहरे मानक करार दिया।

महायुति सरकार की उपलब्धियाँ—विशेषकर महिलाओं के लिए योजनाएँ
उपमुख्यमंत्री ने महायुति सरकार द्वारा लागू व प्रस्तावित कल्याणकारी कार्यक्रमों का उल्लेख किया, खासतौर पर महिलाओं को लक्षित योजनाओं को “ऐतिहासिक” बताते हुए दावा किया कि 2.5 करोड़ बहनों को लाभ पहुंचाने के लिए पहलें की गई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सत्ता पाने के सपने देखते हुए पहले से ही “फाइव-स्टार होटल और मंत्रालय” बुक कराने की सोच में थे, लेकिन मतदाताओं—विशेषकर महिलाओं—ने उन्हें नकारते हुए महायुति को फिर से सत्ता सौंपी।

मैं पहले कार्यकर्ता, फिर उपमुख्यमंत्री: शिंदे
शिंदे ने अपनी राजनीतिक पहचान पर जोर देते हुए कहा कि वे खुद को 24×7 उपलब्ध रहने वाला पार्टी कार्यकर्ता मानते हैं, पद केवल सेवा का माध्यम है।

चिकित्सा समुदाय को सम्मान, कोविड अनुभव का हवाला
समारोह के मुख्य उद्देश्य पर लौटते हुए शिंदे ने कोविड-19 जैसे संकट काल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की अहम भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में हर प्रयास के बावजूद जान बचाना संभव नहीं हो पाता; ऐसे समय समाज को चिकित्सकों पर हमला करने या दोषारोपण से बचना चाहिए और जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए। चिकित्सा बिरादरी को “समाज का आधार” बताते हुए उन्होंने उन्हें गहरे सम्मान का पात्र कहा।

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