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ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एचपीसीएल के बढ़ते कदम

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एचपीसीएल के बढ़ते कदम

– विजाग रिफाइनरी विश्व की प्रथम आरयूएफ सुविधायुक्त यूनिट

– पीआईबी के सौजन्य से उत्तराखंड के पत्रकारों ने किया रिफाइनरी का भ्रमण

रमन जयसवाल

विशाखापट्टनम। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) की विशाखापट्टनम रिफाइनरी (विजाग रिफाइनरी) ने हाल ही में अपनी आधुनिकीकरण परियोजना के तहत महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनिंग क्षमता में मजबूती आई है। रिफाइनरी अब 15 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता के साथ संचालित हो रही है, जो लगभग 300,000 बैरल प्रति दिन के बराबर है। रिफाइनरी में दुनिया की पहली एलसी-मैक्स आधारित रेजिड्यू हाइड्रोक्रैकिंग यूनिट (आरयूएफ) है जहां क्रुड आयल का 93 प्रतिशत उपयोग किया जाता है। इस रिफानरी के माध्यम से सात राज्योें को अब पाइप लाइन के जरिए पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति की जा रही है।

प्रेस इंफॉरमेशन ब्यूरो देहरादून के सौजन्य से उत्तराखंड के 11 पत्रकारों की एक टीम ने 9 फरवरी से 13 फरवरी तक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम का दौरा किया। पत्रकारों की टीम ने एचपीसीएल की रिफाइनरी का भ्रमण कर पेट्रोलियम उत्पादों की जानकारी ली। रिफाइनरी में रेजिड्यू अपग्रेडेशन फैसिलिटी के कमीशनिंग की रही है। जनवरी 2026 में कमीशन की गई यह 3.55 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाली यूनिट दुनिया की पहली एलसी-मैक्स आधारित रेजिड्यू हाइड्रोक्रैकिंग यूनिट है। इस तकनीक से बॉटम ऑफ द बैरल कहे जाने वाले कम मूल्य वाले रेजिड्यू का लगभग 93ः हिस्सा उच्च मूल्य वाले डिस्टिलेट उत्पादों (जैसे डीजल, पेट्रोल) में बदल जाता है। इससे डिस्टिलेट यील्ड में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है और ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

पत्रकारों को जानकारी देते हुए विजाग रिफाइनरी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रमेश कृष्णन ने बताया कि रिफाइनरी में एलसी-मेक्स अपग्रेड भारत को भारी और जटिल क्रूड ऑयल प्रोसेस करने की क्षमता प्रदान करता है। यह आत्मनिर्भर भारत और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है। इस मौके पर सुचित्रा ने प्रोजेक्टर पर एचपीसीएल के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके अलावा, रिफाइनरी में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल का डेमोंस्ट्रेशन प्लांट भी जनवरी 2026 में कमीशन किया गया, जो हरित ईंधन की दिशा में एचपीसीएल के प्रयासों को दर्शाता है।

एचपीसीएल अब विजाग रिफाइनरी की क्षमता को अगले 3-4 वर्षों में 18 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी के अनुसार, यह विस्तार भारत की बढ़ती ईंधन मांग को पूरा करने और क्लीन एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा।

विशाखापट्टनम रिफाइनरी, जो 1957 में स्थापित हुई थी, आज भारत की सबसे आधुनिक डीप कन्वर्जन रिफाइनरियों में से एक है। नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स अब 11.6 पर पहुंच गया है, जो इसकी उन्नत तकनीकी क्षमता को प्रमाणित करता है। यह परियोजना मेक इन इंडियाश् और आत्मनिर्भर भारत अभियान की जीवंत मिसाल बनी हुई है, जहां स्वदेशी तकनीक और नवाचार से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।

पत्रकारों की टीम ने रिफाइनरी के 11वीं मंजिल से पूरी रिफाइनरी का विहंगम दृश्य भी देखा। रिफाइनरी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रमेश कृष्ण ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि भारत की हरित ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व करते हुए विजाग रिफाइनरी ने 370 टीपीए क्षमता का हरित हाईड्रोजन संयंत्र की शुरूआत की है। तथा हरित हाइड्रोजन की खरीद के लिए बीओओ आधार पर समझौता किया हे।

पीआईबी की ओर से पत्रकारों का यह टूर कंडक्टर करने वाले सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल ने कहा कि एचपीसीएल आधुनिक और आत्मनिर्भर भारत की पहचान है। इस रिफाइनरी के भ्रमण का उदेश्य पत्रकारों और जनता को पेट्रोलियम क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता और मेक इन इंडिया के प्रयासों की जानकारी देना है। यह भ्रमण प्रासंगिक रहा।

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