Headline
03 कुमाऊं रेजीमेंट के रेजिंग-डे समारोह में शामिल हुए मंत्री गणेश जोशी
03 कुमाऊं रेजीमेंट के रेजिंग-डे समारोह में शामिल हुए मंत्री गणेश जोशी
पौड़ी में घेरबाड़ नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन, डीएम ने दिए निर्देश
पौड़ी में घेरबाड़ नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन, डीएम ने दिए निर्देश
जिलाधिकारी ने विकास भवन के विभिन्न कार्यालयों का किया विस्तृत निरीक्षण
जिलाधिकारी ने विकास भवन के विभिन्न कार्यालयों का किया विस्तृत निरीक्षण
30 मिनट की वॉक से कम होगा वजन या नहीं? आइये जानते हैं क्या है पूरा सच
30 मिनट की वॉक से कम होगा वजन या नहीं? आइये जानते हैं क्या है पूरा सच
पिथौरागढ़ में कारपेंटर ने घर की अलमारी तोड़कर उड़ाए 12 लाख के जेवर, गिरफ्तार
पिथौरागढ़ में कारपेंटर ने घर की अलमारी तोड़कर उड़ाए 12 लाख के जेवर, गिरफ्तार
देहरादून में दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के लिए लगेंगे चिन्हीकरण शिविर, मिलेंगे निःशुल्क सहायक उपकरण
देहरादून में दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के लिए लगेंगे चिन्हीकरण शिविर, मिलेंगे निःशुल्क सहायक उपकरण
प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने की “आंगन का मिलन”कार्यक्रम की समीक्षा
प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने की “आंगन का मिलन”कार्यक्रम की समीक्षा
लव रंजन की आगामी फिल्म ‘पहला प्यार दूसरी बार’ का पहला पोस्टर जारी, रिलीज़ डेट का भी हुआ एलान
लव रंजन की आगामी फिल्म ‘पहला प्यार दूसरी बार’ का पहला पोस्टर जारी, रिलीज़ डेट का भी हुआ एलान
उत्तराखण्ड के 100 प्रमुख ट्रेक एवं हाइक रूट्स की होगी GPS/GIS मैपिंग
उत्तराखण्ड के 100 प्रमुख ट्रेक एवं हाइक रूट्स की होगी GPS/GIS मैपिंग

प्रकृति से लड़कर कोई आज तक जीत नहीं सका

प्रकृति से लड़कर कोई आज तक जीत नहीं सका

उत्तराखंड स्थित केदारनाथ में गौरीकुंड के पास पहाड़ी से पत्थर नीचे गिरने के कारण तीन लोगों की मौत वाकई दुखद है। हादसे में पांच लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं।

दरअसल, पहाड़ों में बारिशों के कारण अक्सर ही जमीन खिसकने (लैंड स्लाइड) के मामले होते रहते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि लैंड स्लाइड होने के कारण ही यह हादसा हुआ है। हादसा रविवार सुबह हुआ। पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर गिरने की घटना तीन स्थानों पर हुई। गौर करने वाली बात यह है कि गौरीकुंड-जहां हादसा हुआ है-वहां से केदारनदाथ धाम तक 16 किलोमीटर लंबे पैदल यात्रा मार्ग पर कई संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां हल्की बारिश में ही पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने लगता है।

यह पूरा स्ट्रेच भूस्खलन की दृष्टि से अतिसंवेदनशील है। इस मामले में कुछ ऐसा हुआ कि उस दिन भारी बारिश हो रही थी और श्रद्धालु यात्रा पर थे। उन्हें इस आशंका का भान ही न हो सका। यहां प्रशासन की जिम्मेदारी को परखना जरूरी बन जाता है। जब यह बात वहां के प्रशासन और आपदा प्रबंधन को मालूम था तो फिर यात्रियों को इसकी जानकारी देना उनका फर्ज था। वैसे भी केदारनाथ में इससे पहले कई हादसे हुए हैं।

बीते आठ वर्षो में वर्षाकाल के दाौरान इस मार्ग पर हादसे में 19 व्यक्तियों को जान गंवानी पड़ी। इस नाते वहां के प्रशासन को इसकी तैयारियां चौकस रखनी चाहिए थी। यह घनघोर लापरवाही का मामला है। इसकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए थी। हालांकि अब प्रशासन अपनी साख बचाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, मगर यह सब कवायद यात्रा शुरू होने से पहले होनी चाहिए थी। ताजा निर्देश के मुताबिक शाम 5 बजे से दूसरे दिन सूर्योदय तक केदारनाथ पैदल मार्ग पर आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।
यात्रियों की भी जिम्मदारी है कि वो खुद से खतरा मोल न लें। अगर मौसम साफ है और यात्रा में कोई व्यवधान की अग्रिम सूचना नहीं है तभी आगे बढ़ा जा सकता है। प्रकृति से लडक़र कोई आज तक जीत नहीं सका है। सभी लोगों को उसके रौद्र रूप की वजहों की तलाश करनी होगी और उसका सम्मान भी करना होगा। पहाड़ी राज्यों में लोगों की जरूरत से ज्यादा आवाजाही और अंधाधुंध निर्माण के कायरे पर बहुत सोच-समझकर आगे बढऩा होगा। प्रकृति के साथ तारतम्य बनाने और उसके अनुरूप चलने से ही जान-माल के नुकसान से बचा जा सकता है। यह बात हर किसी को अपने जेहर में रखनी होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top