Headline
राष्ट्रीय खेल दिवस पर उत्तराखण्ड को मिलेगी खेल विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक सौगात : रेखा आर्या
राष्ट्रीय खेल दिवस पर उत्तराखण्ड को मिलेगी खेल विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक सौगात : रेखा आर्या
उत्तराखंड में विंटर टूरिज्म को मिलेगी नई उड़ान, नए पर्यटन डेस्टिनेशन विकसित करने पर जोर
उत्तराखंड में विंटर टूरिज्म को मिलेगी नई उड़ान, नए पर्यटन डेस्टिनेशन विकसित करने पर जोर
श्रीनगर बस अड्डे का 31 अगस्त तक होगा हस्तांतरण, डीएम ने विकास परियोजनाओं में तेजी के दिए निर्देश
श्रीनगर बस अड्डे का 31 अगस्त तक होगा हस्तांतरण, डीएम ने विकास परियोजनाओं में तेजी के दिए निर्देश
नन्हे-मुन्ने बच्चों संग कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मनाया रक्षाबंधन
नन्हे-मुन्ने बच्चों संग कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने मनाया रक्षाबंधन
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन से मिले विश्व बैंक के अधिकारी
मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी में नया रिकॉर्ड, 2.35 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों ने कराया पंजीकरण
मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी में नया रिकॉर्ड, 2.35 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों ने कराया पंजीकरण
कम खाना खाने के बावजूद क्यों बढ़ता है वजन? रोटी नहीं, ये आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार
कम खाना खाने के बावजूद क्यों बढ़ता है वजन? रोटी नहीं, ये आदतें हो सकती हैं जिम्मेदार
आंध्र प्रदेश में दर्दनाक सड़क हादसा, बस-ऑटो की टक्कर में 7 लोगों की मौत, कई घायल
आंध्र प्रदेश में दर्दनाक सड़क हादसा, बस-ऑटो की टक्कर में 7 लोगों की मौत, कई घायल
‘टॉक्सिक’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका, पहले दिन ही पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा
‘टॉक्सिक’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका, पहले दिन ही पार किया 100 करोड़ का आंकड़ा

समान संहिता या सियासत?

समान संहिता या सियासत?

देश में समान नागरिक संहिता हो, यह अपेक्षा अपने-आप में उचित है। लेकिन ऐसी अपेक्षाओं का इस्तेमाल फौरी सियासी फायदे के लिए किया जाए, यह वाजिब नहीं है। इसलिए बेहतर होगा कि सरकारें पहले आम-सहमति से तैयार करें, ताकि उनके इरादे पर सवाल ना उठें।
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनने जा रहा है। समान नागरिक संहिता लागू करना भारतीय जनता पार्टी के बुनियादी एजेंडे का हिस्सा रहा है। इसलिए इसमें कोई असामान्य बात नहीं है कि कोई भाजपा सरकार इसे लागू करने की दिशा में बढ़े। लेकिन मुद्दा प्रस्तावित संहिता के समान होने का है। समान संहिता का सीधा अर्थ यह है कि यह देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होगी, चाहे वे किसी मजहब, जाति या समुदाय से संबंधित हों। इस कसौटी को ध्यान में रखें, तो उत्तराखंड की पहल समस्याग्रस्त नजर आती है, क्योंकि राज्य के आदिवासी समुदायों को इससे बाहर रखने का फैसला किया गया है। क्यों और इसका क्या तर्क है? अगर कथित समान संहिता लागू होने के बाद भी आदिवासी समुदायों को अपनी परंपरा और मान्यताओं के मुताबिक जीने की छूट बनी रहेगी, तो यही सुविधा अन्य समुदायों को क्यों नहीं मिलनी चाहिए? इस बिंदु पर कर उत्तराखंड की संहिता एक स्पष्ट सोच या सही इरादे पर आधारित पहल लगने के बजाय फौरी राजनीतिक फायदे के मकसद से की गई पहल मालूम पडऩे लगती है।

इससे यह धारणा गहराती है कि इसके पीछे इरादा महजबी आधार पर ध्रुवीकरण को मजबूती देना है, ताकि भाजपा के समर्थक चुनावों में पार्टी को विजयी बनाने के लिए उत्साहित बने रहें। खबरों के मुताबिक नई नागरिक संहिता के लागू होने के बाद राज्य में बहु-विवाह, इद्दत, हलाला आदि जैसी प्रथाओं पर रोक लग जाएगी। लिवइन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पुलिस में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाएगा। बाल विवाह पर भी रोक लगाने की बात इसमें शामिल की गई है, लेकिन यह कोई नई पहल नहीं है। बल्कि सवाल तो यह उठेगा कि इस सिलसिले में पहले से लागू कानून पर अमल सुनिश्चित कराने में भाजपा सरकार ने कितनी दिलचस्पी ली है? देश में समान नागरिक संहिता हो, यह अपेक्षा अपने-आप में उचित है। लेकिन ऐसी अपेक्षाओं का इस्तेमाल फौरी सियासी फायदे के लिए किया जाए, यह उचित नहीं है। इसलिए बेहतर होगा कि सरकारें पहले आम-सहमति से तैयार करें, ताकि उनके इरादे पर सवाल ना उठें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top