Headline
प्रधानमंत्री मोदी ने टिहरी सड़क हादसे पर जताया दुःख
प्रधानमंत्री मोदी ने टिहरी सड़क हादसे पर जताया दुःख
मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से भूतपूर्व सैनिक के एक प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से भूतपूर्व सैनिक के एक प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव करता रहेगा प्रेरित- सीएम
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उनके साथियों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव करता रहेगा प्रेरित- सीएम
मुख्यमंत्री धामी ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया स्वागत
मुख्यमंत्री धामी ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर किया स्वागत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में चमकेगा उत्तराखंड : रेखा आर्या
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में चमकेगा उत्तराखंड : रेखा आर्या
मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं
एनडीएमए सदस्य डाॅ. असवाल ने आपदा की तैयारियों को परखा
एनडीएमए सदस्य डाॅ. असवाल ने आपदा की तैयारियों को परखा
आगामी नेशनल गेम्स में पदकों की संख्या बढ़ाने पर करें फोकस : रेखा आर्या
आगामी नेशनल गेम्स में पदकों की संख्या बढ़ाने पर करें फोकस : रेखा आर्या

लोकतंत्र में नक्सलवाद और माओवाद गंभीर चुनौती

लोकतंत्र में नक्सलवाद और माओवाद गंभीर चुनौती

अजय दीक्षित
केन्द्र सरकार लगातार दावे करती रही। है कि नक्सलवाद और माओवाद जैसे चरमपंथी संगठनों को प्रभावहीन कर दिया गया है लेकिन छत्तीसगढ़ के वीजापुर जिले में वीते मंगलवार की घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि यहां इन संगठनों की जड़ें जमीं हुई हैं। यहां माओवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान तीन सुरक्षाकर्मी शहीद हो गये और 15 अन्य घायल हो गये। सुरक्षाकर्मियों की जवाबी कार्रवाई में 6 माओवादी भी मारे गये। यह मुठभेड़ बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर स्थित टेकलगुडेम गांव के पास उस समय हुई जव कोवरा कमांडो की 201 बटालियन और सीआरपीएफ की 150 बटालियन का संयुक्त दल तलाशी अभियान चला रहा था। लोकतंत्र में नक्सलवाद और माओवाद जैसी हिंसक विचारधारा का कोई स्थान नहीं है। इसलिए केन्द्र की सरकार माओवाद से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिये प्रभावी कदम उठा रही है। अगर पिछले 10 वर्ष की घटनाओं को देखा जाये तो माओवादी घटनाओं में काफी गिराबट आई है लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि इस पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया गया है।

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने दो तरह की रणनीति बनाई है। पहली, माओवादियों के खिलाफ सघन अभियान चलाना और दूसरी, इससे प्रभावित इलाकों में द्रुत गति से विकास करना। अभी पिछले दिनों ही केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि देश अगले 3 साल में माओवाद और नक्सलवाद की समस्या से मुक्त हो जायेगा। माओवाद और नक्सलवादी आन्दोलन के उभार के कारणों की पड़ताल करें तो यह तथ्य सामने आता है कि कम्युनिस्ट खेमे आदिवासियों के मन में यह भाव स्थापित करने में सफल रहे हैं कि उनका लगातार शोषण हो रहा है। उन्हें उनके जल, जंगल और जमीन से वंचित किया जा रहा है। ऐसे में उनको इसका प्रतिरोध करना चाहिए।

इस बात के आलोक में यह कहा जा सकता है कि जब तक आदिवासियों के मन से यह भाव समाप्त नहीं किया जायेगा तब तक नक्सल समस्या से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ जा सकता। इसलिए आदिवासी क्षेत्रों में केवल आर्थिक विकास ही जरूरी नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ सांस्कृतिक विकास भी आवश्यक है। नक्सल समस्या का सम्बन्ध आदिवासियों की अस्मिता से भी जुड़ा हुआ है। उन्हें यह महसूस होना चाहिये कि लोकतंत्र में उनकी अस्मिता का सम्मान हो रहा है, और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आदिवासी समाज के लिए हितकारी है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top