Headline
राष्ट्रपति भवन के एट होम रिसेप्शन के लिए अल्मोड़ा की गर्विता भाकुनी का चयन
राष्ट्रपति भवन के एट होम रिसेप्शन के लिए अल्मोड़ा की गर्विता भाकुनी का चयन
सफलताएं प्राप्त करने से भी कठिन उन सफलताओं के शिखर पर टिके रहना है- डॉ पंकज कुमार पांडेय
सफलताएं प्राप्त करने से भी कठिन उन सफलताओं के शिखर पर टिके रहना है- डॉ पंकज कुमार पांडेय
नीलकंठ कांवड़ यात्रा: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन मुस्तैद
नीलकंठ कांवड़ यात्रा: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन मुस्तैद
रातीघाट के पास रामगढ़ नदी में डूबे युवक का शव बरामद, SDRF का सर्च अभियान सफल
रातीघाट के पास रामगढ़ नदी में डूबे युवक का शव बरामद, SDRF का सर्च अभियान सफल
सर्किट हाउस काठगोदाम में शहरी विकास कार्यों की समीक्षा, मंत्री राम सिंह कैड़ा ने दिए समयबद्ध कार्य पूर्ण करने के निर्देश
सर्किट हाउस काठगोदाम में शहरी विकास कार्यों की समीक्षा, मंत्री राम सिंह कैड़ा ने दिए समयबद्ध कार्य पूर्ण करने के निर्देश
CIMS कॉलेज में नशा मुक्ति अभियान का आगाज़, राष्ट्रीय अभियान से जुड़ना उत्तराखंड के लिए गौरव: एडवोकेट ललित मोहन जोशी
CIMS कॉलेज में नशा मुक्ति अभियान का आगाज़, राष्ट्रीय अभियान से जुड़ना उत्तराखंड के लिए गौरव: एडवोकेट ललित मोहन जोशी
हल्द्वानी में आयुक्त दीपक रावत की जनसुनवाई, मौके पर सुलझाए कई मामले; महिला को दिलाए 9.5 लाख रुपये
हल्द्वानी में आयुक्त दीपक रावत की जनसुनवाई, मौके पर सुलझाए कई मामले; महिला को दिलाए 9.5 लाख रुपये
दो दिवसीय स्वास्थ्य शिविर में 931 मरीजों ने उठाया लाभ, 258 जांचें और 146 रेडियोलॉजी टेस्ट हुए
दो दिवसीय स्वास्थ्य शिविर में 931 मरीजों ने उठाया लाभ, 258 जांचें और 146 रेडियोलॉजी टेस्ट हुए
जनता की शिकायतों पर होगी तय समय में कार्रवाई : बंशीधर तिवारी
जनता की शिकायतों पर होगी तय समय में कार्रवाई : बंशीधर तिवारी

भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम

भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम

भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रख्यात व सार्वजनिक हस्तियों को जिम्मेदार व्यवहार करना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि विज्ञापन जारी करने की अनुमति से पहले केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के अनुसार, विज्ञापनदाताओं से स्वघोषणापत्र हासिल किया जाए। इस कानून का नियम 7 विज्ञापन संहिता का प्रावधान करता है जिसमें कहा गया है कि विज्ञापन देश के कानूनों के अनुरूप बनाए जाने चाहिए। अदालत पतंजलि आयुव्रेद लिमिटेड द्वारा भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही है। ये विज्ञापन निषिद्ध किए जा चुके हैं।

पीठ ने संबद्ध केंद्रीय मंत्रालयों को भी इन भ्रामक विज्ञापनों व केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण द्वारा की गई या प्रस्तावित कार्रवाई से अवगत कराने को भी कहा। प्रचार व विज्ञापन उपभोक्ता को प्रभावित करने में महती भूमिका निभाते हैं। उस पर जब यह किसी प्रख्यात या सार्वजनिक शख्सियत द्वारा किया जा रहा हो तो आम जनता को खास तौर पर प्रभावित करता है। इस मामले में तो कोविड टीकाकरण व आधुनिक चिकित्सा पण्राली को सीधा निशाना बनाया गया था जिस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने याचिका दायर की जिस पर सुनवाई चल रही है।

इसमें संदेह नहीं कि लाभ के लोभ में कंपनियां भ्रामक प्रचार द्वारा सालों-साल जनता को बरगलाती रहती हैं। संबंधित मंत्रालय व विभाग इनके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने से मुंह फेर लेते हैं। निराधार दावों, अतिरंजित बातों, छद्म दावों व अनुचित सूचना वाले तथा असुरक्षित उत्पादों से उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रहे तमाम विज्ञापन अभी भी बेधडक़ प्रकाशित/प्रचारित हो रहे हैं जो बच्चों के कोमल मन को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं, युवाओं को दिग्भ्रमित व बुजुगरे को भ्रमित कर रहे हैं।

नियमों की अवहेलना करते हुए नामदार शख्सियत धन के लोभ में इनका बेतहाशा प्रचार करती हैं जिनके आधार पर कहना ज्यादती नहीं होगा कि वे उपभोक्ताओं के अधिकारों को तरजीह देने को राजी नहीं। ऐसा सिर्फ इसीलिए हो रहा है क्योंकि समूची व्यवस्था अपनी जिम्मेदारियों के प्रति घोर लापरवाही बरतती है। बात अकेले पतंजलि की नहीं है। इसे उदाहरण मान कर संबंधित मंत्रालयों व विभागों को सतर्क हो जाना चाहिए। न कि एक-एक विज्ञापन को लेकर अदालतों का दरवाजा खटखटाने वालों के इंतजार में बैठे रहना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top