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लंबे समय तक तेज बुखार के साथ कमजोरी और पेट दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है टायफाइड

लंबे समय तक तेज बुखार के साथ कमजोरी और पेट दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है टायफाइड

लगातार या लंबे समय तक तेज बुखार के साथ थकान, कमजोरी, सिर दर्द, भूख कम लगना, जी मिचलाना, पेट दर्द, कब्ज या दस्त की शिकायत हो तो टायफाइड की आशंका हो सकती है। त्वचा पर हल्के गुलाबी रंग के दाने भी इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं। टायफाइड साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है।

टायफाइड होने पर घबराने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह, निर्धारित उपचार, पर्याप्त आराम, सुरक्षित तरल पदार्थ और संतुलित भोजन पर ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का सही समय पर सेवन करना जरूरी है।

टायफाइड के लक्षण कई अन्य संक्रमणों से मिलते-जुलते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर टायफाइड मान लेना या अपने मन से दवा शुरू करना ठीक नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर उपचार करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, टायफाइड की पुष्टि के लिए रक्त जांच महत्वपूर्ण है।

बीमारी के दौरान शरीर को ऊर्जा और पोषण की जरूरत होती है। तेज बुखार, मितली या पेट की परेशानी के कारण भूख कम लग सकती है। ऐसे में अधिक भोजन करने के बजाय सहनशीलता के अनुसार हल्का और पौष्टिक भोजन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेना बेहतर रहता है। लगातार उल्टी हो, खाना-पानी न टिक रहा हो या कमजोरी बढ़ रही हो तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

तुरंत उपचार शुरू होने पर बुखार आम तौर पर 10 दिनों तक रह सकता है, जबकि उपचार में देरी होने पर यह 3-4 सप्ताह या उससे अधिक समय तक भी रह सकता है। इस दौरान लक्षण गंभीर हो सकते हैं और अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं।

केवल बुखार उतर जाने का मतलब संक्रमण पूरी तरह खत्म होना नहीं है। इसलिए डॉक्टर ने जितने दिनों के लिए दवाएं लिखी हैं, उनका पूरा कोर्स करना जरूरी है। बीच में दवा छोड़ने से संक्रमण दोबारा होने और बुखार की समस्या बढ़ने का खतरा रहता है।

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रभाकर भूषण मिश्रा के अनुसार, टायफाइड में हाइड्रेशन सबसे जरूरी है। साफ उबला हुआ पानी, ओआरएस, नारियल पानी, दाल का पानी या पतली छाछ लेते रहना चाहिए। टायफाइड में छोटी आंत के अंदर घाव-सा हो सकता है, इसलिए हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन लेना चाहिए। उनके अनुसार, सही इलाज से टायफाइड 7-14 दिन में ठीक हो सकता है। दवाओं का कोर्स पूरा नहीं करने पर बीमारी दोबारा हो सकती है। ठीक होने के बाद टायफाइड का टीका भी लगवाया जा सकता है।

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